कर्नाटक : कांग्रेस में फिर तेज हुई सियासी हलचल
- मुख्यमंत्री पद को लेकर बढ़ी बयानबाजी से भीतरखाने की खींचतान उजागर। 80 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा
Khabari Chiraiya Desk : कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही अंदरूनी रस्साकशी एक बार फिर सार्वजनिक बहस का विषय बन गई है। पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर मतभेदों की चर्चा तब तेज हो गई जब एक वरिष्ठ विधायक ने खुले तौर पर उपमुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग दोहरा दी।
कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र और पार्टी के एमएलसी यतींद्र सिद्धारमैया के हालिया बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राजनीतिक मामलों में संयम और अनुशासन जरूरी है। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर कई विधायक चाहते हैं कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को भी इस कार्यकाल में नेतृत्व संभालने का अवसर मिले।
समर्थन का दावा और अनुशासन की नसीहत
इकबाल हुसैन ने दावा किया कि करीब 80 से 90 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी जाए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय हाईकमान को ही करना है।

उन्होंने कहा कि पार्टी एक अनुशासित संगठन है और नेताओं को सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जिनसे भ्रम या असंतोष की स्थिति पैदा हो। उनके अनुसार निजी भावनाएं अपनी जगह हैं, लेकिन राजनीति में संगठनात्मक मर्यादा सर्वोपरि होनी चाहिए।
डीके शिवकुमार को मौका देने की मांग
हुसैन ने दोहराया कि उनकी व्यक्तिगत इच्छा है कि मौजूदा कार्यकाल के भीतर ही डीके शिवकुमार को नेतृत्व का अवसर दिया जाए। उनका कहना है कि कई विधायक मन ही मन यही चाहते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से बयानबाजी से बच रहे हैं ताकि किसी तरह का असमंजस न फैले।
इसी क्रम में कांग्रेस के एक अन्य विधान परिषद सदस्य चन्नाराज हट्टीहोली ने भी इच्छा जताई कि डीके शिवकुमार को जल्द मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
यतींद्र के बयान से बढ़ी चर्चा
दरअसल विवाद की शुरुआत तब हुई जब यतींद्र सिद्धारमैया ने कथित तौर पर यह कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उनके पिता को पूरे कार्यकाल तक मुख्यमंत्री बनाए रखने की स्वीकृति दे दी है। इस बयान के बाद सियासी हलकों में हलचल बढ़ गई।
डीके शिवकुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जो भी कहा गया है, उसे वे सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे बयान पार्टी नेतृत्व के अधिकार क्षेत्र से जुड़े विषय हैं।
आधे कार्यकाल के बाद तेज हुई खींचतान
कर्नाटक सरकार अपने पांच वर्षीय कार्यकाल के मध्य बिंदु को पार कर चुकी है। इसी चरण के बाद से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के अलावा गृह मंत्री जी परमेश्वर का नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है।
पार्टी नेतृत्व फिलहाल सार्वजनिक रूप से किसी बदलाव के संकेत नहीं दे रहा, लेकिन विधायकों के बयानों से यह साफ है कि अंदरखाने चर्चा जारी है। अब सभी की नजरें कांग्रेस हाईकमान के रुख पर टिकी हुई हैं, जो तय करेगा कि कर्नाटक में नेतृत्व की बागडोर आगे किसके हाथ में रहेगी।
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