15 फरवरी को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि, जानें व्रत और पूजा का सही समय
- फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में बनेगा विशेष संयोग, श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में शिव पूजन रहेगा अत्यंत फलदायी
Khabari Chiraiya Desk: देवाधिदेव महादेव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी यानी रविवार को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम लगभग 5 बजे प्रारंभ होगी और 16 फरवरी की शाम तक रहेगी। चूंकि चतुर्दशी तिथि का निशीथ काल 15 फरवरी की रात्रि में पड़ रहा है, इसलिए शास्त्र सम्मत रूप से महाशिवरात्रि का व्रत और मुख्य पूजन 15 फरवरी को ही किया जाएगा। जो श्रद्धालु केवल चतुर्दशी व्रत करते हैं, वे 16 फरवरी को भी व्रत रख सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। यह दिन तप, संयम और वैराग्य के प्रतीक भोलेनाथ के गृहस्थ जीवन में प्रवेश का भी प्रतीक माना जाता है। इसीलिए महाशिवरात्रि को दांपत्य सुख, मनोकामना पूर्ति और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व कहा जाता है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग का अभिषेक कर विशेष पूजा अर्चना करते हैं।

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है, जिसे शिव आराधना के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। पंचांग के अनुसार 15 फरवरी की रात्रि में श्रवण नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जो सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है। ऐसे दुर्लभ योग में भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होने की मान्यता है।
पूजा की शुरुआत प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और शुद्ध वस्त्र धारण कर व्रत संकल्प से करनी चाहिए। घर के मंदिर या पूजा स्थान को स्वच्छ कर चौकी पर स्वच्छ लाल या पीला वस्त्र बिछाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गंगाजल का छिड़काव कर वातावरण को पवित्र बनाएं। इसके बाद भगवान शिव का जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और फल अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। रात्रि में चार प्रहर की पूजा और महामृत्युंजय मंत्र या शिव पंचाक्षरी मंत्र का जप अत्यंत फलदायी माना गया है।
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