राजस्थान की फैक्ट्री में अग्निकांड, पूर्वी चंपारण के सात श्रमिकों की दर्दनाक मौत
- भिवाड़ी की केमिकल यूनिट में भीषण विस्फोट के बाद लगी आग, घोड़ासहन, चिरैया और हरसिद्धि में पसरा मातम, कई घायल अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे
Khabari Chiraiya Desk : राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी स्थित खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से आई एक भयावह खबर ने बिहार के पूर्वी चंपारण जिले को गहरे शोक में डुबो दिया है। एक केमिकल फैक्ट्री में हुए जोरदार विस्फोट और उसके बाद भड़की भीषण आग ने सात श्रमिकों की जान ले ली। मृतकों में सभी पूर्वी चंपारण के रहने वाले बताए जा रहे हैं। जैसे ही यह दुखद समाचार उनके गांवों तक पहुंचा, घरों में चीख-पुकार मच गई और पूरा इलाका गमगीन हो उठा।
बताया जाता है कि फैक्ट्री में अचानक विस्फोट हुआ, जिसके बाद आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि भीतर काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका। धुएं और लपटों के बीच कई श्रमिक फंस गए। दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था।

मृतकों की स्थिति इतनी गंभीर थी कि कई शवों की पहचान तुरंत संभव नहीं हो सकी। प्रशासन ने डीएनए जांच और अन्य प्रक्रियाओं के माध्यम से शिनाख्त की प्रक्रिया शुरू की। अब तक जिनकी पहचान हुई है, उनमें घोड़ासहन के श्रीपुर नगरवा के मिंटू कुमार, चिरैया प्रखंड के नारायणपुर निवासी सुजंत कुमार और हरसिद्धि के मटिअरवा गांव के अमरेश कुमार, श्याम कुमार और रवि कुमार शामिल हैं। शेष मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
इस त्रासदी की सबसे अधिक मार चिरैया, घोड़ासहन और हरसिद्धि प्रखंडों पर पड़ी है। गांवों में मातम पसरा है। जिन घरों से रोज कमाई के लिए मजदूर बाहर गए थे, वहीं अब सन्नाटा और आंसू हैं। परिवार के लोग यह विश्वास ही नहीं कर पा रहे कि जिनसे कुछ दिन पहले बात हुई थी, वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। कई घरों में छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया।
घटना में कई अन्य मजदूर भी गंभीर रूप से झुलस गए हैं। मनु पासवान, नितेश कुमार, कन्हैया पासवान, आशिक पासवान और दीपलाल कुमार सहित अन्य घायल अस्पताल में भर्ती हैं। चिकित्सकों के अनुसार कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन ने घायलों के बेहतर इलाज का आश्वासन दिया है।
मृतक और घायल सभी मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में बिहार से राजस्थान गए थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बेहतर भविष्य की उम्मीद में उन्होंने परदेस का रुख किया था। लेकिन यह औद्योगिक हादसा उनके सपनों पर भारी पड़ गया। ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरों को अक्सर जोखिम भरे हालात में काम करना पड़ता है और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है।
घटना के बाद बिहार सरकार भी सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि राजस्थान प्रशासन से समन्वय स्थापित कर पार्थिव शरीरों को सम्मानपूर्वक उनके गांवों तक पहुंचाया जाए।
पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन भी लगातार राजस्थान के अधिकारियों के संपर्क में है। जिलाधिकारी ने बताया कि शिनाख्त, पोस्टमार्टम और शवों को लाने की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर सांत्वना दी और हर संभव सहायता का भरोसा दिया।
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केमिकल फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों का पालन किस हद तक हो रहा है, यह जांच का विषय बन गया है। श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाए तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
गांवों में लोग अब सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक मजदूरों की जान ऐसे हादसों में जाती रहेगी। जिन परिवारों ने अपने बेटों और भाइयों को खो दिया है, उनके लिए यह क्षति अपूरणीय है। आर्थिक सहायता कुछ राहत दे सकती है, लेकिन जिंदगी की कमी को कोई नहीं भर सकता।
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