नए वित्त वर्ष की शुरुआत से बदली जेब की पूरी तस्वीर
टैक्स से लेकर टोल और रसोई तक असर, नियम बदले तो खर्च और बचत दोनों की गणित भी बदल गई
नई दिल्ली : 1 अप्रैल यानी आज से पुरानी आयकर व्यवस्था की जगह नया कानून लागू हो गया है, जिसका मकसद प्रक्रियाओं को आसान बनाना है। लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ जैसे जटिल शब्दों को खत्म कर दिया गया है। अब 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की अवधि को सीधे ‘टैक्स ईयर 2026-27’ कहा जाएगा। यह बदलाव आम करदाताओं के लिए समझ को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए भी यह साल बड़ा बदलाव लेकर आया है। नए श्रम नियम लागू होने की स्थिति में अब कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50% हो। इसका सीधा असर यह होगा कि प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ेगा। यानी रिटायरमेंट के समय ज्यादा फायदा मिलेगा, लेकिन फिलहाल हाथ में आने वाली सैलरी कम हो सकती है। साथ ही HRA पर टैक्स छूट पाने के लिए अब मकान मालिक का पैन कार्ड और किराया भुगतान का प्रमाण देना अनिवार्य कर दिया गया है।

यात्रा करने वालों के लिए भी खर्च बढ़ा है। फास्टैग के एनुअल पास की कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। यह पास देशभर के करीब 1150 टोल प्लाजा पर मान्य होगा और इसकी वैधता एक साल या 200 टोल पार करने तक ही रहेगी। यानी रोजाना हाईवे पर चलने वालों को अब थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।
रेलवे यात्रियों के लिए भी नियम बदले गए हैं। अब टिकट रद्द करने पर रिफंड समय के आधार पर मिलेगा। ट्रेन छूटने से 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर 50% पैसा वापस मिलेगा, 24 से 72 घंटे के बीच 25% कटेगा, 72 घंटे से पहले सिर्फ फ्लैट चार्ज लगेगा और अगर 8 घंटे से कम समय बचा है तो कोई रिफंड नहीं मिलेगा। हालांकि राहत यह है कि अब यात्री ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं।
बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब बैंकों को कर्ज से जुड़ा डेटा हर हफ्ते क्रेडिट एजेंसियों को देना होगा। पहले यह प्रक्रिया 15 दिन में होती थी। इससे आपका क्रेडिट स्कोर ज्यादा तेजी से अपडेट होगा और लोन लेने में आसानी होगी।
पहचान से जुड़े नियमों में भी बदलाव हुआ है। अब पैन कार्ड बनवाने के लिए केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा। जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज देना जरूरी होगा। साथ ही पैन आवेदन की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है।
निवेश करने वालों के लिए भी नया नियम लागू हुआ है। अगर किसी ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को सेकेंडरी मार्केट से खरीदा है तो उस पर 12.5% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। जबकि सीधे आरबीआई से खरीदकर मैच्योरिटी तक रखने पर टैक्स छूट मिलती रहेगी।
रोजमर्रा के खर्च की बात करें तो एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। कमर्शियल सिलिंडर के दाम में 218 रुपये तक इजाफा हुआ है। दिल्ली में इसकी कीमत 1883 रुपये से बढ़कर 2078.50 रुपये हो गई है, जिससे होटल और छोटे व्यवसायों पर सीधा असर पड़ेगा।
डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित बनाने के लिए भी नया नियम लागू किया गया है। अब सिर्फ ओटीपी के भरोसे ट्रांजैक्शन नहीं होंगे, बल्कि टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे ऑनलाइन भुगतान और सुरक्षित हो सके।
कुल मिलाकर, नए वित्त वर्ष की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि आर्थिक नियमों में बदलाव सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हर घर की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। अब यह जरूरी हो गया है कि आम लोग इन बदलावों को समझें और अपने खर्च और बचत की योजना को उसी के अनुसार ढालें।
