February 6, 2026

खबरी चिरईया

नजर हर खबर पर

75th Independence Day: आजादी के गुमनाम नायकों को सम्मानित करेगी मोदी सरकार


Notice: Trying to get property 'post_excerpt' of non-object in /home/u305984835/domains/khabarichiraiya.com/public_html/wp-content/themes/newsphere/inc/hooks/hook-single-header.php on line 67

मोदी सरकार की आजादी के ‘अनसंग’ हीरो यानी ‘गुमनाम’ नायकों (स्वतंत्रता सेनानियों) को सम्मानित करने की योजना है। आजादी के जश्न के मौके पर इतिहास के पन्नों में कहीं गुम हो चुके ऐसे नायकों को मोदी सरकार सम्मानित करेगी। अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में गुमनाम नायकों और कम प्रसिद्धि पाए समूहों और स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं को प्रदर्शित करने की योजना बना रही है। अधिकारियों ने बताया कि गुमनाम नायकों के भारत के स्वाधीनता संग्राम में योगदान को रेखांकित करने के लिए कई कार्यक्रम और व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।

सरकार ने ऐसे 146 गुमनाम नायकों और समूहों की एक सूची तैयार की है। सरकार ने आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के बैनर तले 75 क्षेत्रीय, छह राष्ट्रीय और दो अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों (सेमिनार) की योजना बनाई है। इन नामों को अलग-अलग सरकारी विभागों और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) द्वारा संकलित किया गया है।

Advertisements
Panchayat Voice

बताया जा रहा है कि 146 नामों को उनके मूल राज्य द्वारा चुनकर भेजा गया है और इस लिस्ट में छोटी जनजातियों और जातियों के नायक भी भी शामिल हैं। गुमनाम नायकों की लिस्ट में घेलूभाई नाइक, कृषि अर्थशास्त्री मोहनलाल लल्लूभाई दंतवाला, जनसंघ के पूर्व विचारक नानाजी देशमुख और कम्युनिस्ट नेता रवि नारायण रेड्डी हैं। इस सूची में ओडिशा के लक्ष्मण नायक, झारखंड के तेलंगा खारिया और तेलंगाना के कोमाराम भीम जैसे कई आदिवासी नेता भी शामिल हैं।

अल्पज्ञात समूहों (जिन समूहों को लोगों के बारे में लोगों में जानकारी कम है) की सूची में हिंदू महासभा, आंध्र प्रदेश लाइब्रेरी एसोसिएशन, कर्नाटक साहित्य परिषद और बंगाल की अनुशीलन समिति शामिल हैं। सरकार ने कम ज्ञात घटनाओं और साहित्य की सूची भी तैयार की।

पहली सूची में सूरत नमक आंदोलन (1840), कंपनी राज के खिलाफ युद्ध, जिसे सिपाही विद्रोह भी कहा जाता है, (1857-58), बुंदेलखंड प्रतिरोध (1808), और रंगपुर किसान विद्रोह (1783) शामिल हैं। वहीं, इसकी दूसरी सूची में एक्षलोक गीता (मराठी पुस्तक, 1910), हिंदू धर्म का झंडा (हिंदी पैम्फलेट 1927), गदर दी गंज (गुरुमुखी, 1910), चौरी चौरा जजमेंट (अंग्रेजी, 1923), और इंकलाब (उर्दू, 1927) शामिल हैं।

इतिहासकार मृदुला मुखर्जी ने कहा कि हम सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद और बिरसा मुंडा को ‘अनसंग हीरो’ (गुमनाम नायक) नहीं कह सकते। उन्होंने सूची में तात्या टोपे, नानाजी देशमुख और रवि नारायण रेड्डी को भी शामिल किया है। दरअसल, सूची में उन लोगों के भी कुछ नाम शामिल हैं, जो 1930 के दशक में पैदा हुए और स्वतंत्रता सेनानी कहलाए। यह एक बहुत ही असमान सूची है। उन्होंने कहा कि नामों के चयन में एकरूपता नहीं है, यह बेतरतीब सूची है।

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के सांसद और शिक्षा की स्थायी समिति के प्रमुख विनय सहस्रबुद्धे ने इससे असहमति जताई है। सांसद ने कहा कि अगर आपने उनके साथ न्याय नहीं किया है, तो न्याय करने का एक समय होना चाहिए। चाहे वह सुभाष चंद्र बोस हों या कोई अन्य, उन्हें वह श्रेय नहीं मिला जिसके वे हकदार हैं।

यह भी पढ़ें…

आगे की खबरों के लिए आप हमारे Website पर बने रहें…

error: Content is protected !!