March 19, 2026

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“वर्ल्ड यूनानी डे” पर चिकित्सों ने ली यूनानी पद्धति को बढ़ावा देने के लिए लोगों को जागरूक करने की शपथ

देवरिया (यूपी)। विश्व यूनानी दिवस (वर्ल्ड यूनानी डे) पर गोरखपुर डिवीजन के यूनानी चिकित्सों ने यूनानी पद्धति को बढ़ावा देने के लिए लोगों को जागरूक करने की शपथ ली। इसका आयोजन नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) यूनानी फोरम यूपी स्टेट एवं नीमा यूनानी फोरम गोरखपुर डिवीजन के तत्वधान में किया गया। देवरिया स्थित एक क्लीनिक पर आयोजित कार्यक्रम में यूनानी चिकित्सकों ने वर्ल्ड यूनानी डे के बारे में विस्तार से चर्चा की।

बताया कि विश्व यूनानी दिवस महान यूनानी विद्वान हकीम अजमल खान की जयंती का दिन है। वे नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया के संस्थापकों में से एक थे। इतना ही नहीं हकीम साहब एक प्रसिद्ध भारतीय यूनानी चिकित्सक थे। वह एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी, एक महान विद्वान, एक समाज सुधारक, एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, एक यूनानी चिकित्सा शिक्षाविद् और यूनानी चिकित्सा पद्धति में वैज्ञानिक अनुसंधान के संस्थापक थे।

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डिविजनल सेक्रेटरी नीमा यूनानी फोरम के डॉ. जफर अनीस ने बताया की हकीम अजमल खान के जन्मदिवस 11 फरवरी को राष्ट्रीय यूनानी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हकीम अब्दुल हमीद साहब ने हमदर्द तिब्बिया कॉलेज की स्थापना कर यूनानी को विश्व में पहचान दी। यूनानी चिकित्सा पद्धति बिना किसी साइड इफेक्ट के पुरानी एवं गंभीर रोगों को जड़ से खत्म करती है एवं शरीर को निरोग स्वास्थ्य एवं बलवान बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

डॉ. जफर ने बताया कि भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति की शुरुआत 10वीं शताब्दी में मानी जाती है, किंतु भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति को पुनर्जीवित कर आधुनिक रूप देने का श्रेय हकीम अजमल खान को जाता है। हकीम अजमल खान के प्रयासों से ही दिल्ली में यूनानी चिकित्सा में पढ़ाई हेतु तिब्बिया कॉलेज की स्थापना हुई। डॉ. जियाउल हक ने बताया कि यूनानी चिकित्सा पद्धति को लाखों सालों से इस्तेमाल होने वाली हर्बल यूनानी दवाएं आजमाई हुई साइड इफेक्ट रहित है, इसलिए आज पूरा विश्व बहुत तेजी के साथ यूनानी चिकित्सा पद्धति से इलाज के तरफ लौट रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जफर अनीस डिविजनल सेक्रेटरी नीमा यूनानी फोरम एवं डॉ. जियाउल हक ने की। इस मौके पर डॉ. यासीन अंसारी, डॉ. इरशाद खान, डॉ. हैदर अली, डॉ. एमडी अंसारी, डॉ. मोहम्मद अली, डॉ. सफीउल्लाह, डॉ. आरिफ अंसारी, डॉ. शाहिद जमाल, डॉ. निजाम, डॉ. अबरार अहमद, डॉ. फैज अहमद मोहम्मद आरिफ, डॉ. अब्दुल रब, डॉ. खान, डॉ. मोहम्मद आलम, मास्टर परवेज सहित अन्य ने अपनी बात रखी।

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