बांग्लादेश @ शेख हसीना युग के बाद पहला आम चुनाव
- 12 करोड़ से अधिक मतदाता 299 सीटों पर कर रहे मतदान, कुल 1,981 उम्मीदवार मैदान में
Khabari Chiraiya Desk: नई दिल्ली : बांग्लादेश में आज राजनीतिक इतिहास का एक अहम अध्याय लिखा जा रहा है। देश में आम चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भारतीय समयानुसार सुबह 7 बजे से मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं और शाम साढ़े चार बजे तक वोट डाले जाएंगे। यह चुनाव 2024 में हुए व्यापक और हिंसक जनआंदोलन के बाद हो रहा है, जिसने 15 वर्षों से सत्ता में रही तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को गिरा दिया था।
सरकार के पतन के लगभग 18 महीने बाद आयोजित यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। 2009 के बाद पहली बार देश में वास्तविक राजनीतिक मुकाबले की स्थिति बनी है। बांग्लादेश की करीब 17 करोड़ आबादी में से 12 करोड़ से अधिक नागरिक मतदान के पात्र हैं। संसदीय 300 सीटों में से 299 सीटों पर मतदान हो रहा है, जबकि एक सीट पर विशेष कारणों से चुनाव स्थगित है। कुल 1,981 उम्मीदवार मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

चुनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं और प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतदान का आश्वासन दिया है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इस चुनाव की एक बड़ी विशेषता यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग मैदान में नहीं है। पिछले वर्ष अंतरिम सरकार ने पार्टी को भंग कर दिया था और उसके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई थी। ऐसे में मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात ए इस्लामी के बीच माना जा रहा है।
देश में मतदान के साथ एक व्यापक 84 सूत्री सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया जा रहा है। इस सुधार एजेंडे को राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनमत संग्रह भविष्य की शासन व्यवस्था की दिशा तय कर सकता है।
चुनाव से ठीक पहले एक और बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान लगभग 17 वर्षों बाद देश लौटे। वह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं और प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदार माने जा रहे हैं। अपनी मां के निधन के बाद उन्होंने पार्टी की कमान संभाली और बांग्लादेश फर्स्ट के नारे के साथ जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश की लोकतांत्रिक दिशा और स्थिरता की परीक्षा भी है। 2024 के आंदोलन के बाद देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण गहरा हुआ था, ऐसे में यह मतदान प्रक्रिया राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी पर भी परखी जा रही है।
मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं। युवाओं और महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय बताई जा रही है। प्रशासन का दावा है कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई जाएगी। अब निगाहें मतगणना और परिणामों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि बांग्लादेश में सत्ता की कमान किसके हाथों में जाएगी और देश किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ेगा।
यह भी पढ़ें… श्रीलंका से लौटे भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष
यह भी पढ़ें… वंदे मातरम् को लेकर नया राष्ट्रीय प्रोटोकॉल
यह भी पढ़ें… अब छिप नहीं पाएगा एआई कंटेंट
आगे की खबरों के लिए आप हमारी वेबसाइट पर बने रहें...
