बिहार : पटना सिविल कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की फिर मिली धमकी
- बिहार : पप्पू यादव की जमानत सुनवाई से पहले फिर ईमेल अलर्ट, बेऊर जेल में बंद सांसद की बेल पर मंडराता साया
Khabari Chiraiya Desk: बिहार की राजधानी पटना में न्यायिक व्यवस्था एक बार फिर धमकी के साए में आ गई है। गुरुवार सुबह पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद कोर्ट परिसर में अफरातफरी मच गई। यह लगातार तीसरा दिन है जब निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई से पहले धमकी भरा ईमेल सामने आया है।
पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव इस समय पटना के बेऊर जेल में बंद हैं। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन धमकी के कारण अदालत की कार्यवाही प्रभावित हुई। जिला अधिवक्ता संघ ने सुरक्षा कारणों से वकीलों को सूचित किया कि न्यायिक कार्य दिन के दूसरे हिस्से में शुरू किए जाएंगे। इससे पहले भी सोमवार और बुधवार को इसी प्रकार की धमकियों के कारण सुनवाई टल चुकी है। मंगलवार को हालांकि अदालत की प्रक्रिया सामान्य रही और एक पुराने मामले में उन्हें जमानत मिली, लेकिन दूसरे केस में न्यायिक हिरासत जारी रहने के कारण वे जेल से बाहर नहीं आ सके।

लगातार तीसरी बार कोर्ट को धमकी मिलने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन ईमेल के पीछे कौन है। किस उद्देश्य से जमानत सुनवाई के दिन ही कोर्ट को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं, लेकिन अब तक धमकी भेजने वाले तक पहुंचने में सफलता नहीं मिली है।
ताजा ईमेल में पूरे कोर्ट भवन को उड़ाने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई और बम निरोधक दस्ते को अलर्ट पर रखा गया। पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू कर दी है और ईमेल के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच बेऊर जेल में बंद पप्पू यादव के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट भी सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। पोस्ट में बिहार पुलिस पर सवाल उठाए गए हैं और कोर्ट को मिली धमकियों का जिक्र करते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी की गई है।
पृष्ठभूमि की बात करें तो पप्पू यादव को 31 वर्ष पुराने एक कथित जालसाजी मामले में विशेष अदालत ने जमानत दी थी। हालांकि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस कार्य में बाधा डालने के आरोप में दर्ज एक अन्य केस के कारण उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। उनके अधिवक्ता शिवनंदन भारती के अनुसार 1995 से जुड़े मामले में राहत मिल चुकी है, लेकिन बुद्धा कॉलोनी थाना में दर्ज दूसरे मामले की सुनवाई लंबित है। अब लगातार मिल रही धमकियों ने पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है। अदालत, पुलिस और प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वे न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करें बल्कि धमकी देने वाले की पहचान कर उसे कानून के दायरे में लाएं।
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