June 13, 2026

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भारत-चीन रिश्तों में नया मोड़

भारत-चीन रिश्तों
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  • गुप्त चिट्ठी से खुला संवाद का दरवाज़ा, अमेरिका के टैरिफ़ ने बदली समीकरण की दिशा

Khabari Chiraiya Desk : भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने कूटनीतिक रिश्तों को हिला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मित्र कहकर संबोधित करते रहे, लेकिन इसी बीच भारत पर टैरिफ़ थोपकर उन्होंने दोस्ती की परिभाषा बदल दी। इसी दौरान चीन ने एक अप्रत्याशित पहल की…एक गुप्त चिट्ठी, जो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी। यह चिट्ठी महज़ शब्दों का काग़ज़ी पुल नहीं, बल्कि भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने का इशारा है।

गुप्त पत्र से शुरू हुआ बदलाव

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2025 में शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र लिखकर भारत और चीन के रिश्तों को सुधारने की इच्छा जताई। इसमें स्पष्ट किया गया था कि अगर भारत और अमेरिका के बीच कोई बड़ा समझौता होता है तो चीन को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ेगा। यह संदेश प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा और तभी से भारत-चीन रिश्तों में नरमी दिखने लगी।

अमेरिका के टैरिफ़ ने बदली चाल

अप्रैल 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन दोनों पर टैरिफ़ का बड़ा प्रहार किया। इस फैसले ने भारत और चीन को एक-दूसरे के करीब आने का अवसर दिया। यही कारण है कि लंबे समय से जमी बर्फ़ अब पिघलने लगी और नई बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया।

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रिश्तों की गर्माहट के संकेत

दिल्ली और बीजिंग के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हो चुकी हैं। चीन ने भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश-मानसरोवर यात्रा का रास्ता खोला और भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीज़ा सुविधा बहाल की। इतना ही नहीं, भारत ने टिकटॉक जैसी चीनी कंपनी को फिर से देश में वापसी की इजाज़त दी है। दूसरी ओर, चीन ने भी व्यापार और सुरक्षा मामलों में भारत का साथ देने का संकेत दिया है।

पीएम मोदी का चीन दौरा

सात साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन पहुंच रहे हैं। 31 अगस्त और 1 सितंबर को वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां उनकी शी जिनपिंग से मुलाकात तय है। इससे पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मामलों के प्रमुख वांग यी के बीच दिल्ली में अहम वार्ता हुई थी। अब दोनों देशों की सेनाओं ने भी सीमा पर शांति और स्थिरता लाने की बात कही है।

भविष्य की दिशा

गुप्त चिट्ठी ने भारत-चीन रिश्तों में एक अप्रत्याशित मोड़ ला दिया है। लंबे समय से चल रहे तनाव के बाद संवाद की नई शुरुआत दोनों देशों को सहयोग की दिशा में ले जा सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह बातचीत आगे बढ़ी तो एशिया की राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों पर इसका गहरा असर होगा।

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