झारखंड में आदिवासी सीटों पर BJP और JMM की सीधी टक्कर, कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ीं
झारखंड विधानसभा चुनाव-2024 : 81 विधानसभा सीटों में से 43 सीटों पर पहले फेज में 13 नवंबर को होने जा रहा है मतदान
झारखंड की सत्ता की लड़ाई इस बार बेहद दिलचस्प हो गई है। राजनीतिक गलियारों में हलचल है, पार्टियों के गठबंधन बन और टूट रहे हैं, और हर दल अपनी रणनीति में बदलाव कर राज्य में पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है। इस बार की चुनावी जंग में BJP ने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जो उसके इरादों को स्पष्ट करते हैं। चुनावी समीकरणों को समझते हुए, BJP ने JMM के चंपाई सोरेन को अपने पक्ष में करने के साथ ही NDA में JDU और LJP (रामविलास) जैसी पार्टियों को जोड़ा है। इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री के परिजनों को टिकट देकर आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश की गई है।
कांग्रेस की हालत इस चुनाव में कमजोर नजर आ रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस के लिए यह चुनाव एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। पिछली बार झारखंड में कांग्रेस की स्थिति मजबूत थी, लेकिन इस बार पार्टी में संगठनात्मक कमजोरी और नेतृव क्षमता की कमी के कारण कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है। एक अनुमान के अनुसार, कांग्रेस की सीटें 18 से नीचे सकती हैं, जो पार्टी के लिए झटका साबित होगा।

इस बार झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में से 43 सीटों पर पहले फेज में 13 नवंबर को मतदान होने जा रहा है। राजनीतिक दृष्टि से यह फेज सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें 20 आदिवासी सीटें हैं, जहां BJP और JMM के बीच कड़ी टक्कर है। आदिवासी समुदाय झारखंड की राजनीति में एक मजबूत स्थान रखता है, और इसी कारण BJP ने इस समुदाय को केंद्र में रखते हुए अपनी रणनीति बनाई है। JMM, जो आदिवासी समुदाय की प्रमुख पार्टी मानी जाती है, को BJP ने घेरने के लिए सभी हथकंडे अपनाए हैं, और चुनावी मैदान में कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।
NDA के समीकरण को देखें तो पहले फेज में 16 से 24 सीटों पर उसका पलड़ा भारी नजर आ रहा है। BJP अपने दम पर 14 से 21 सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि JDU, आजसू, और LJP (रामविलास) की भी एक-एक सीट पर नजर बनी हुई है। इसका अर्थ है कि BJP ने गठबंधन की ताकत का उपयोग कर राज्य में अपनी पकड़ मजबूत की है। दूसरी ओर, INDIA ब्लॉक के तहत JMM की स्थिति 11-15 सीटों पर मजबूत नजर आ रही है, लेकिन कांग्रेस और RJD की स्थिति कमजोर है। कांग्रेस 0-4 सीटों पर सीमित होती नजर आ रही है, और RJD की स्थिति भी कुछ खास नहीं है।
आदिवासी सीटों पर सीधी टक्कर के चलते झारखंड की चुनावी तस्वीर स्पष्ट होती जा रही है। इस बार का चुनाव सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों पर अधिक निर्भर करता दिखाई दे रहा है। बीजेपी की रणनीति स्पष्ट है- उसने अपने गठबंधन के जरिए सामाजिक समीकरण साधे हैं, वहीं JMM अपने पारंपरिक वोटबैंक पर भरोसा कर रही है। चुनावी जंग के इस पहले चरण में आदिवासी मतदाता एक निर्णायक भूमिका निभाएंगे, और उनकी चुनावी पसंद का असर न केवल इस फेज में बल्कि आगे के चुनावी चरणों पर भी पड़ेगा।
कुल मिलाकर, झारखंड में चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है। जहां एक ओर BJP और उसके सहयोगी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर JMM अपने जनाधार को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है। कांग्रेस के लिए यह चुनाव एक अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। इस बार के नतीजे न केवल झारखंड की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेंगे बल्कि देश की राजनीति में भी इनका असर देखा जाएगा।
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