June 30, 2026

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कार्तिक पूर्णिमा : भक्ति, प्रकाश और पवित्रता का महापर्व

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इस वर्ष कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि 15 नवंबर को सुबह 06:19 बजे से शुरू होकर 16 नवंबर को रात 02:58 बजे तक रहेगी

कार्तिक पूर्णिमा : भारत के धार्मिक त्योहारों में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष स्थान है, जो साल भर की श्रद्धा और आस्था को चरम पर ले जाता है। कार्तिक मास की यह पूर्णिमा तिथि, जो इस साल 15 नवंबर को पड़ रही है, आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था का अनूठा संगम लेकर आती है। कहा जाता है कि इस दिन देवी-देवता स्वयं पृथ्वी पर अवतरित होते हैं और उनके स्वागत में दीपों की जगमगाहट से संपूर्ण वातावरण पवित्र और दिव्यता से ओतप्रोत हो जाता है। भक्तजन इस पर्व पर गंगा स्नान, दीप प्रज्वलन और पूजन-अर्चना कर अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि 15 नवंबर को सुबह 06:19 बजे से शुरू होकर 16 नवंबर को रात 02:58 बजे तक रहेगी। इस दिन भक्तजन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के साथ शिव परिवार की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान विष्णु को प्रिय भोग अर्पित करने की परंपरा है, जिससे उन्हें प्रसन्नता प्राप्त होती है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है; यह माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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इस पर्व में चंद्र देव की पूजा का भी विशेष विधान है। कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि में जल में चंद्र देवता की प्रतिमा देखकर उनकी उपासना करना मानसिक शांति और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। चंद्र देव की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु विशेष अनुष्ठान करते हैं, जिससे उनके जीवन में शांति और समृद्धि का संचार होता है।

कार्तिक पूर्णिमा का पर्व भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर राक्षस के संहार से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, त्रिपुरासुर ने तीनों लोकों पर आतंक मचा रखा था। इस दिन भगवान शिव ने उसका संहार कर धर्म की स्थापना की थी। इसे बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है, और इस दिन शिव भक्त भगवान शिव का पूजन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा का दिन सिख समुदाय के लिए भी अत्यंत पवित्र है, क्योंकि इसी दिन सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। गुरु नानक जयंती पर गुरुद्वारों में विशेष अरदास और कीर्तन का आयोजन होता है। इस दिन लंगर के माध्यम से समाज सेवा की जाती है और गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का स्मरण किया जाता है, जो मानवता, एकता और समानता के संदेश को फैलाने पर जोर देती हैं।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवी-देवताओं के पृथ्वी पर आगमन की मान्यता है। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में दीपक जलाकर उनका स्वागत करते हैं। दीपों की यह पंक्ति वातावरण को अलौकिक बनाती है और सभी के मन में भक्ति और पवित्रता का संचार करती है। यह प्रकाशमयी रात श्रद्धालुओं के जीवन में आस्था और आनंद का संचार करती है।

कार्तिक पूर्णिमा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में शांति, सौहार्द और समृद्धि का प्रतीक भी है। इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिकता का संचार करते हैं। यह पर्व भक्ति और श्रद्धा से भरपूर है, जो हर व्यक्ति के मन में आस्था और श्रद्धा की भावना को और प्रबल बनाता है।

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