February 6, 2026

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बिहार चुनाव: मांझी ने थामी अपनी शर्तें, एनडीए में सीट फार्मूले पर नई हलचल

बिहार चुनाव

सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने अपने कोटे की 15 सीटों की सूची सौंप दी है। मांझी का रुख बताता है कि वह जीती हुई सीटों से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं

Khabari Chiraiya Desk : बिहार चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर सीटों का समीकरण अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने साफ संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी अपनी जीती हुई सीटों से किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेगी। शनिवार को उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को अपने हिस्से की संभावित 15 सीटों की सूची सौंप दी, जिससे एनडीए में नए सिरे से हलचल तेज हो गई है।

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मांझी असम के सरकारी दौरे से लौटकर सीधे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, जहां पत्रकारों ने उनसे सीट बंटवारे पर सवाल पूछा। इस पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा-“अगर भाजपा अध्यक्ष बोल रहे हैं कि सीट बंटवारा हो गया तो शायद हो ही गया होगा! मुझे फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है, मैं सीधे बैठक में जा रहा हूं।”
उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि वे अपने हिस्से को लेकर सतर्क हैं और बिना चर्चा के किसी फैसले पर हामी नहीं भरेंगे।

दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद मांझी भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में शामिल हुए। इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और राज्य इकाई के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस दौरान मांझी और उनके पुत्र संतोष सुमन ने विस्तार से अपने कोटे की सीटों का ब्योरा प्रस्तुत किया और स्पष्ट किया कि हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से) पिछली बार की अपनी स्थिति से समझौता करने को तैयार नहीं है।

करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक के बाद मांझी बिना किसी टिप्पणी के बाहर निकले। उनकी खामोशी ने अटकलों को और हवा दी है। देर शाम उन्हें दिल्ली के एक सरकारी कार्यक्रम में देखा गया, जहां उन्होंने पत्रकारों से बात करने से परहेज किया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मांझी की रणनीति साफ है-वे भाजपा नेतृत्व पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं ताकि अपने कोटे की सीटों को सुरक्षित रख सकें। दूसरी ओर, भाजपा पहले ही जेडीयू और चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) के साथ समझौते की घोषणा कर चुकी है। अब बची हुई सीटों के बंटवारे पर हम (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की रालम के बीच खींचतान बाकी है।

बिहार में नामांकन प्रक्रिया के साथ चुनावी तापमान बढ़ चुका है और अब एनडीए के अंदर की यह “सीट सियासत” गठबंधन के भीतर शक्ति-संतुलन की असली परीक्षा बन गई है।

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