May 9, 2026

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वृंदावन : माता पार्वती ने पहली बार भगवान शिव के लिए किया था करवा चौथ का व्रत

  • यह व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है

Khabari Chiraiya, वृंदावन : कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला करवा चौथ पर्व आज पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और रात्रि में चांद के दर्शन के साथ व्रत का समापन करती हैं।

वृंदावन के शत्रुघ्न प्रभु जी महाराज ने बताया कि यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। इस दिन महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव सहित पूरे शिव परिवार की पूजा करती हैं। उनका कहना है कि यह व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए अपने पति के दीर्घ जीवन की प्रार्थना करती हैं।

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इस दिन का सबसे प्रतीकात्मक क्षण वह होता है जब महिलाएं चांद के निकलने का इंतजार करती हैं। चंद्रमा के उदय के बाद वे अर्घ्य देकर छलनी से पहले चांद को और फिर अपने पति को देखती हैं। मान्यता है कि छलनी के हजारों छोटे छिद्रों से जितने प्रतिबिंब चांद के दिखते हैं, उतनी बार पति की आयु में वृद्धि होती है। यह दृश्य न केवल आध्यात्मिक भावना जगाता है, बल्कि प्रेम और आस्था की गहराई को भी उजागर करता है।

प्रभु जी महाराज के अनुसार, पौराणिक मान्यता यह भी है कि करवा चौथ का व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। उनके अनुकरण में माता सीता ने भी भगवान राम के लिए यह व्रत किया था। तभी से यह परंपरा अखंड सौभाग्य का प्रतीक बन गई।

करवा चौथ की पूजा में विशेष सामग्री का उपयोग किया जाता है : लकड़ी का आसन, देसी घी, पान, सींक, कलश, हल्दी, रोली, मौली, फल, फूल, मिठाई, तांबे या मिट्टी का करवा और व्रत कथा की पुस्तक। पूजा के समय महिलाएं लाल वस्त्र पहनकर श्रृंगार करती हैं और पूजा थाल सजा कर भगवान शिव-पार्वती की आराधना करती हैं।

व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले ‘सरगी’ खाने से होती है, जिसमें सूखे मेवे और फल शामिल होते हैं। इसके बाद महिलाएं दिनभर पूजा, कथा और ध्यान में समय बिताती हैं। रात में चांद के दर्शन के बाद ही जल और अन्न ग्रहण करती हैं।

करवा चौथ न केवल एक धार्मिक पर्व है बल्कि भारतीय नारी की दृढ़ता, प्रेम और आस्था का प्रतीक है, जो हर वर्ष परिवार और वैवाहिक जीवन में अटूट संबंधों की नई ऊर्जा भरता है।

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