July 30, 2026

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अमेरिका-ईरान के बीच बड़े समझौते की चर्चा

अमेरिका-ईरान
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  •  होर्मुज खोलने और प्रतिबंध हटाने पर बनी सहमति का दावा। स्विट्जरलैंड में 19 जून को हो सकते हैं हस्ताक्षर

मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक व्यापक समझौते को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने, समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनी है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में तैयार किए गए इस प्रस्तावित समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, समझौते के तहत ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल और उनसे जुड़े निर्यात क्षेत्रों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही तेहरान को विदेशों में मौजूद अपने वित्तीय संसाधनों और फंड तक दोबारा पूर्ण पहुंच दिए जाने की बात कही गई है। कई वर्षों से विभिन्न देशों में फ्रीज की गई लगभग 24 अरब डॉलर की राशि को जारी करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इनमें से करीब 12 अरब डॉलर शुरुआती चरण में ही उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

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आर्थिक मोर्चे पर ईरान के पुनर्निर्माण और विकास कार्यों के लिए अमेरिका तथा उसके सहयोगी देशों की ओर से लगभग 300 अरब डॉलर के निवेश और आर्थिक सहायता पैकेज की संभावना भी जताई गई है। इसके अलावा लेबनान सहित क्षेत्र के विभिन्न संघर्ष प्रभावित इलाकों में स्थायी युद्धविराम लागू करने का प्रस्ताव भी समझौते का हिस्सा बताया जा रहा है।

प्रस्तावित व्यवस्था में अमेरिका से ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने तथा उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की प्रतिबद्धता की मांग की गई है। साथ ही ईरान पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह समाप्त करने का सुझाव दिया गया है। दस्तावेजों में ईरान के आसपास मौजूद अमेरिकी सैन्य बलों की तैनाती कम करने अथवा उन्हें हटाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है।

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को भी 30 दिनों के भीतर सामान्य जहाजरानी और अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के लिए खोलने की योजना बताई गई है। वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को राहत मिलने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।

परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों से जुड़े लंबित विवादों के समाधान के लिए 60 दिनों की औपचारिक वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इस अवधि में ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा। वहीं अमेरिका नई आर्थिक पाबंदियां लगाने या क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात करने से परहेज करेगा।

समझौते के पालन और क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र तंत्र स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया है। साथ ही अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मंजूरी दिलाने के प्रयास किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रतिरोधी समूहों को उसका समर्थन इस प्रस्तावित समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी कर संभावित समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने सभी पक्षों को बधाई देते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए खोला जाएगा। ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने के निर्देश देने का भी उल्लेख किया।

उधर, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित बयान में समझौते को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है और इसकी पुष्टि के संकेत दिए हैं। हालांकि, अब तक समझौते का पूरा आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता औपचारिक रूप से लागू हो जाता है, तो यह मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। साथ ही वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

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