August 14, 2026

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डीआरडीओ ने किया लंबी दूरी की लैंड अटैक, क्रूज मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण

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ओडिशा तट से मोबाइल आर्टिकुलेटेड लॉन्चर से किया गया परीक्षण, मिसाइल ने सभी प्राथमिक मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने आज ओडिशा के तट पर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर), चांदीपुर से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (एलआरएलएसीएम) का पहला उड़ान परीक्षण किया। इस परीक्षण में एक मोबाइल आर्टिकुलेटेड लॉन्चर का उपयोग किया गया, और मिसाइल ने उम्मीदों पर खरा उतरते हुए सभी प्राथमिक मिशन के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

तैयार उड़ान पथ की पूरी कवरेज सुनिश्चित करने के लिए मिसाइल की निगरानी आईटीआर द्वारा तैनात कई रेंज सेंसरों के माध्यम से की गई, जिनमें रडार, इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और टेलीमेट्री शामिल थे। मिसाइल ने वे पॉइंट नेविगेशन का प्रयोग करते हुए वांछित पथ का अनुसरण किया और अलग-अलग ऊंचाइयों एवं गति पर उन्नत युक्तिचालन करते हुए अपनी क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया। इसके बेहतर और विश्वसनीय प्रदर्शन को सुनिश्चित करने के लिए इसे उन्नत एवियोनिक्स और सॉफ्टवेयर से लैस किया गया है।

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एलआरएलएसीएम का विकास डीआरडीओ की कई प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योगों के योगदान से हुआ है। इसमें वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान, बेंगलुरु की अहम भूमिका रही है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, हैदराबाद और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु ने इस प्रक्षेपास्त्र के विकास और एकीकरण की प्रक्रिया में सहयोगी भूमिका निभाई है। इस परीक्षण को डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ तीनों सेनाओं के प्रतिनिधियों ने देखा।

एलआरएलएसीएम रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा अनुमोदित एक मिशन मोड परियोजना है। इसे न केवल जमीन से बल्कि फ्रंटलाइन जहाजों से यूनिवर्सल वर्टिकल लॉन्च मॉड्यूल सिस्टम के माध्यम से भी लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को इस सफल परीक्षण के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण भविष्य में स्वदेशी क्रूज मिसाइल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने इस पहले सफल प्रक्षेपण पर डीआरडीओ की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं, जिससे देश की क्रूज मिसाइल क्षमता में एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ है।

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