June 13, 2026

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प्रियंका गांधी के बैग से सियासत गर्म, फिलिस्तीन के बाद बांग्लादेश के हिंदू और ईसाई समुदाय का जिक्र

प्रियंका गांधी

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  • भाजपा ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए इसे “वोट बैंक की राजनीति” करार दिया है।

नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के कंधे पर टंगे बैग भारतीय राजनीति में नए विमर्श का आधार बन गए हैं। एक के बाद एक विवादित संदेशों वाले बैग संसद में उनके साथ दिखाई दे रहे हैं, जिससे सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सोमवार को ‘फिलिस्तीन’ लिखे बैग के बाद आज बांग्लादेश के हिंदू और ईसाई समुदाय के समर्थन का संदेश देने वाला बैग उनकी उपस्थिति का केंद्र बिंदु बन गया है।

प्रियंका गांधी की इस शैली को बीजेपी ने तुरंत अपने निशाने पर ले लिया है। भाजपा इसे प्रतीकात्मक राजनीति और कांग्रेस की “अंतरराष्ट्रीय मामलों पर दोहरे मापदंड” का उदाहरण बताकर हमलावर हो गई है। हालांकि, प्रियंका के इन संदेशों की आलोचना के बीच उनके समर्थकों का कहना है कि यह वैश्विक मानवाधिकार और धार्मिक अल्पसंख्यकों के समर्थन का एक संदेश है।

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बदलते बैग, बदलते संदेश

प्रियंका गांधी ने सोमवार को संसद में जो बैग लाया था, उस पर ‘फिलिस्तीन’ का स्पष्ट उल्लेख था। इस बैग पर कबूतर के प्रतीक के साथ शांति की अपील दर्ज थी। ऐसे समय में जब फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष ने हजारों मासूमों की जान ली है, प्रियंका का यह संदेश अंतरराष्ट्रीय सियासत की ओर इशारा कर रहा था।

हालांकि, इससे पहले कि यह मुद्दा ठंडा पड़ता, मंगलवार को प्रियंका गांधी एक और संदेशवाहक बैग के साथ नजर आईं। इस बार बैग पर लिखा था, “बांग्लादेश के हिंदुओं और ईसाइयों के साथ खड़े हो।” यह संदेश अपने आप में बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की तरफ ध्यान खींचने वाला था। एक दिन में दो अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को संसद के गलियारों तक पहुंचाकर प्रियंका ने भाजपा को बैकफुट पर डालने की कोशिश की है या कांग्रेस की नयी रणनीति को जमीन पर उतारने का प्रयास किया है, यह सवाल उठने लगा है।

बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया

प्रियंका गांधी के बैगों पर भाजपा ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए इसे “वोट बैंक की राजनीति” करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस देश के आंतरिक मुद्दों को छोड़कर विदेशी विवादों को उभार रही है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गर्माया हुआ है, जहां कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच तीखी बहस चल रही है।

राजनीतिक और प्रतीकात्मक संकेत

प्रियंका गांधी का यह कदम सिर्फ बैग के डिजाइन तक सीमित नहीं है। यह उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। फिलिस्तीन का मुद्दा जहां वैश्विक शांति का प्रतीक बनता है, वहीं बांग्लादेश के हिंदुओं और ईसाइयों के प्रति समर्थन भारतीय उपमहाद्वीप के धार्मिक समीकरणों को छूता है। ऐसे समय में जब भारतीय राजनीति धार्मिक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है, प्रियंका का यह कदम एक रणनीतिक चाल भी हो सकता है।

जनता के बीच संदेश या विवाद?

विपक्ष जहां प्रियंका के इस कदम को “साहसिक” बता रहा है, वहीं जनता के बीच इसकी प्रतिक्रिया मिश्रित है। कुछ लोग इसे कांग्रेस का एक असफल प्रयास मानते हैं, जबकि कुछ इसे वैश्विक मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने की एक सकारात्मक पहल मानते हैं।

प्रियंका गांधी के बैग भले ही सियासी विवाद का कारण बन रहे हों, लेकिन इससे यह साफ है कि कांग्रेस फिलहाल अंतरराष्ट्रीय और मानवाधिकार मुद्दों को अपने राजनीतिक एजेंडे में शामिल करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, भाजपा इसे राष्ट्रीय राजनीति से ध्यान भटकाने की रणनीति मान रही है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रियंका गांधी की यह “बैग राजनीति” आने वाले दिनों में कौन-सा नया मोड़ लेती है और क्या कांग्रेस इसे वोटबैंक के लिहाज से भुना पाती है या नहीं।

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