June 8, 2026

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हवा छीन रही ज़िंदगी, दुनिया में आठ में से एक मौत प्रदूषण से

हवा
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  • रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और भयावह होगा

Khabari Chiraiya Desk : दुनिया की हवा पर नज़र रखने वाली संस्था ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर’ ने अपनी नई रिपोर्ट जारी की है। बोस्टन स्थित हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023 में पूरी दुनिया में 79 लाख लोगों ने वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के कारण जान गंवाई। इसका मतलब है कि दुनिया में होने वाली हर आठ में से एक मौत का कारण खराब हवा रही है।

रिपोर्ट बताती है कि दुनिया की करीब 36 फीसदी आबादी बेहद जहरीली हवा में सांस ले रही है। खास बात यह है कि इन मौतों में 49 लाख लोगों की जान पीएम 2.5 कणों से जुड़ी बीमारियों के कारण गई, जबकि 28 लाख लोग ऐसे थे जो ज्यादातर घर के अंदर रहते थे। यानी अब हवा सिर्फ बाहर नहीं, घरों के भीतर भी घातक हो चुकी है।

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भारत और चीन इस संकट के सबसे बड़े केंद्र बन गए हैं। दोनों देशों में 2023 में 20-20 लाख लोगों की जानें चली गईं। रिपोर्ट में बताया गया कि कुल 90 फीसदी मौतें अकेले एशिया में हुई हैं। इनमें लोअर-मिडल इनकम वाले देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां औद्योगिक विस्तार, वाहन उत्सर्जन और बढ़ती आबादी ने प्रदूषण को नियंत्रण से बाहर कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण न केवल सांस की बीमारियों बल्कि दिल और दिमाग पर भी असर डाल रहा है। करीब 25 फीसदी हार्ट की बीमारियों, 25 फीसदी डिमेंशिया और डायबिटीज के मामलों की वजह भी प्रदूषण बताई गई है। इन बीमारियों की वजह से 2023 में वैश्विक स्तर पर लोगों के जीवन से 11.6 मिलियन स्वस्थ वर्ष कम हो गए।

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एशिया के अलावा अफ्रीकी देशों में भी हालात खराब हैं। बांग्लादेश, पाकिस्तान, नाइजीरिया, इंडोनेशिया और म्यांमार जैसे देशों में लाखों मौतें दर्ज की गईं। जनसंख्या वृद्धि, अवैध निर्माण, घटते जंगल और ऊर्जा की बढ़ती मांग ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा 10 मिलियन मौतों तक पहुंच सकता है। साफ हवा अब विलासिता नहीं, बल्कि जीवन का मूल अधिकार बन चुकी है। दुनिया को यह समझना होगा कि आर्थिक विकास तभी सार्थक है जब उसके साथ सांस लेने का अधिकार भी सुरक्षित हो।

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