June 7, 2026

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नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व की शुरुआत, प्रधानमंत्री मोदी ने दी शुभकामनाएं

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  • महापर्व छठ पूजा : आस्था, अनुशासन और प्रकृति के संगम का पर्व अब बिहार से निकलकर पूरे देश का उत्सव बना

Khabari Chiraiya Desk : लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा शनिवार को नहाय-खाय की रस्म के साथ शुरू हो गया। घाटों और तालाबों पर व्रती महिलाओं और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। घर-घर में कदू-भात, चने की दाल और अरवा चावल की खुशबू फैली रही। सादगी, संयम और आस्था से जुड़ा यह पर्व अब सिर्फ बिहार का नहीं, पूरे देश का उत्सव बन चुका है। देश के हर हिस्से में आज छठ की भक्ति-धुन और लोकगीतों की गूंज सुनाई दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देश और दुनिया भर में रहने वाले श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि “छठ पूजा हमारी संस्कृति की उस विराट परंपरा का प्रतीक है, जो सादगी, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव का संदेश देती है।” प्रधानमंत्री ने व्रतियों की अटूट श्रद्धा को नमन करते हुए कहा कि यह पर्व आज भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर में भारतीय परिवारों को एक सूत्र में जोड़ रहा है। उन्होंने छठी मैया को समर्पित एक भक्ति गीत भी साझा किया और सभी से इस पावन ऊर्जा में डूबने का आग्रह किया।

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छठ महापर्व का दूसरा दिन रविवार को खरना के रूप में मनाया जाएगा, जब व्रती दिनभर निर्जला उपवास रख शाम को गुड़-चावल की खीर, रोटी और केले का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके बाद तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य के साथ व्रत का समापन होगा।

देश के कोने-कोने में छठ का उत्सव आज सामूहिकता और एकता की मिसाल बन चुका है। दिल्ली, मुंबई, सूरत, कोलकाता और जयपुर जैसे महानगरों में प्रवासी बिहारी समुदाय के साथ-साथ स्थानीय लोग भी पूरे उत्साह से छठी मैया की आराधना में शामिल हो रहे हैं। घाटों पर बने अस्थायी मंचों से लोकगीतों की मधुर लहरें गूंज रही हैं, तो गलियों में पूजा की तैयारियों से भक्ति का माहौल व्याप्त है।

छठ पूजा अब बिहार की सीमाओं से निकलकर पूरे भारत की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के इस पर्व में हर धर्म, हर वर्ग और हर क्षेत्र के लोग समान आस्था के साथ जुड़ते हैं। यही कारण है कि छठ अब केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की एकता, संस्कृति और समरसता का जीवंत प्रतीक बन चुका है।

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