June 30, 2026

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नेपाल में Gen Z का उबाल फिर तेज

Nepal
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  • सिमारा में जुटी भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को सख्ती अपनानी पड़ी, जिसके बाद हालात बेकाबू होने लगे और कर्फ्यू लगाना पड़ा।

Khabari Chiraiya Desk : नेपाल में गुरुवार को ऐसा माहौल बना जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश की युवा पीढ़ी का असंतोष केवल शांत नहीं हुआ था, बल्कि भीतर ही भीतर सुलग रहा था। सुबह सिमारा चौक पर बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए युवाओं ने राजनीतिक नेतृत्व और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध शुरू किया। प्रदर्शन तेजी से उग्र होने लगे तो पुलिस ने भीड़ को हटाने की कोशिश की। इस दौरान तनाव बढ़ा और सिमारा से सटे कई हिस्से संवेदनशील घोषित कर दिए गए।

स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती देख प्रशासन ने दोपहर में पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू लागू कर दिया। टकराव का दायरा उस समय और बढ़ गया जब सिमारा एयरपोर्ट के पास पुलिस और युवाओं के बीच संघर्ष गहराने लगा। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का सहारा लिया, जिसके बाद एयरपोर्ट का संचालन तत्काल रोकना पड़ा। यात्रियों और कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया और पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई।

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युवाओं की नाराजगी की जड़ें पिछले दिनों हुई झड़पों से जुड़ी हैं। Gen Z समूह ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इन झड़पों में शामिल रहे यूएमएल समर्थकों पर दर्ज शिकायतों की धीमी जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में यूएमएल नेताओं के जिले में दौरे की योजना ने तनाव को और हवा दे दी और आंदोलन फिर से भड़क उठा।

यह विरोध केवल एक स्थानीय राजनीतिक टकराव नहीं है, बल्कि उस अस्थिर माहौल की पुनरावृत्ति है जिसने दो महीने पहले नेपाल में बड़े पैमाने पर हिंसा को जन्म दिया था। सितंबर की घटनाओं में 76 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था और उस समय की सरकार को गिरने पर मजबूर कर दिया था। सत्ता परिवर्तन के बाद सुशीला कार्की के नेतृत्व में नई सरकार बनी थी, जिसने संसद भंग करने और नए चुनाव कराने का संकेत देकर राजनीतिक माहौल को और उथलपुथल में डाल दिया।

आज के विरोध प्रदर्शन इस बात की पुष्टि करते हैं कि राजनीतिक नेतृत्व के प्रति युवा वर्ग का असंतोष अब सतही नहीं रह गया है। Gen Z की आवाज और उसका दबाव नेपाल की राजनीति के लिए एक नई चुनौती बन गया है, जो आने वाले चुनावों और देश की स्थिरता-दोनों को प्रभावित कर सकता है।

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