June 29, 2026

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राम जानकी पथ यूपी की सीमा से लेकर नेपाल के भिट्ठमोड़ तक विकास की एक नई रेखा खींचेगा

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यह प्रस्तावित मार्ग लगभग 127 किलोमीटर लंबा होगा, जो यूपी के देवरिया जनपद स्थित मेहरौना घाट से शुरू होकर नेपाल की सीमा तक जाएगा, अयोध्या से जनकपुर को जोड़ने वाला यह प्रस्तावित फोरलेन कॉरिडोर पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी के 75 गांवों की तस्वीर बदलने जा रहा है

Khabari Chiraiya Desk: अयोध्या की धार्मिक आभा और जनकपुर की ऐतिहासिक पहचान को एक आधुनिक मार्ग से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राम जानकी पथ नाम से विकसित हो रहा यह फोरलेन कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर बिहार और नेपाल सीमा क्षेत्र के लिए व्यापक बदलाव का संकेत माना जा रहा है। यह मार्ग उत्तर प्रदेश की सीमा से लेकर नेपाल के भिट्ठमोड़ तक विकास की एक नई रेखा खींचेगा, जिसकी प्रतिध्वनि आने वाले वर्षों तक सुनाई देगी।

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राजस्व विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की स्वीकृति के बाद पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी के इलाकों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रस्तावित मार्ग लगभग 127 किलोमीटर लंबा होगा, जो यूपी के देवरिया जनपद स्थित मेहरौना घाट से शुरू होकर नेपाल की सीमा तक जाएगा। इस परियोजना को इंजीनियरिंग के स्थापित नाम थीम इंजीनियरिंग कंसलटेंट द्वारा तैयार की जा रही विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन के आधार पर विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

इस पथ की खासियत यह है कि यह सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक ढांचे को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। पूर्वी चंपारण के केसरिया स्थित ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप और कैथवलिया में बन रहे विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर को यह मार्ग व्यापक पहचान दिलाएगा। चकिया, कल्याणपुर और मधुबन जैसे ग्रामीण अंचलों से गुजरते हुए यह सड़क न केवल यातायात को आसान बनाएगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भूमि मूल्य और निवेश की संभावनाओं को भी बढ़ाएगी।

जब यह फोरलेन सीतामढ़ी के पुनौरा धाम तक पहुंचेगा, तब माता जानकी की जन्मस्थली तक पहुंच और सुगम हो जाएगी। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। अयोध्या आने वाले श्रद्धालु अब बेहतर सड़क सुविधा के जरिए जनकपुर तक की यात्रा आसानी से कर सकेंगे, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार और सेवा क्षेत्र को नया विस्तार मिलेगा।

परियोजना का सीधा प्रभाव 75 गांवों पर पड़ेगा, जिनमें पूर्वी चंपारण के 40 और सीतामढ़ी के 35 गांव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स, होटल व्यवसाय और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के विकसित होने की संभावना है। पेट्रोल पंप, आधुनिक भोजनालय और भंडारण केंद्र जैसे ढांचे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देंगे। इसके साथ ही बिजली, पानी और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से इन इलाकों में शहरीकरण की प्रक्रिया तेज होगी।

निर्माण कार्य शुरू होने पर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। मशीनों की आवाज के साथ यहां विकास की उम्मीदें भी आकार लेंगी। अंतरराष्ट्रीय सीमा तक सीधी कनेक्टिविटी से व्यापारिक गतिविधियों को बल मिलेगा और यह मार्ग क्षेत्रीय समृद्धि का आधार बन सकता है।

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