March 9, 2026

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राष्ट्रीय नवगीत उत्सव में गूंजेगी हिंदी कविता की नई संवेदना

  • 12 मार्च को एलएनटी कॉलेज में सुबह से रात तक चलेगा नवगीत का साहित्यिक उत्सव, नवगीत अर्धशतक भाग दो का लोकार्पण होगा

Khabari Chiraiya Desk : हिंदी साहित्य की सृजनात्मक परंपरा और नवगीत आंदोलन की गौरवशाली विरासत को केंद्र में रखकर मुजफ्फरपुर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। ललित नारायण तिरहुत कॉलेज में 12 मार्च को राष्ट्रीय नवगीत उत्सव का आयोजन किया जाएगा। नवगीत कुटुंब और कॉलेज के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजन को लेकर कॉलेज परिसर में आयोजित प्रेसवार्ता में कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की गई।

समारोह के संयोजक डॉ संजय पंकज ने बताया कि इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में देश के विभिन्न प्रांतों से लगभग 35 प्रमुख नवगीतकारों की सहभागिता सुनिश्चित हो चुकी है। तीन सत्रों में आयोजित होने वाले इस साहित्यिक समारोह में सम्मान समारोह, पुस्तक लोकार्पण, नवगीत के उद्भव और विकास विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, नवगीत पर गंभीर चर्चा और विमर्श तथा अंतिम सत्र में नवगीतों की प्रस्तुति होगी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन नवगीत और गीत पर शोध कर रहे शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा जिज्ञासु पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी अवसर सिद्ध होगा।

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डॉ संजय पंकज ने कहा कि हिंदी काव्य आंदोलनों के इतिहास में नवगीत आंदोलन सबसे लंबे समय तक प्रभावी और जीवंत रूप में बना रहा है। इस आंदोलन के प्रवर्तक मुजफ्फरपुर के सुप्रसिद्ध कवि कविवर राजेंद्र प्रसाद सिंह माने जाते हैं। उन्होंने 5 फरवरी 1958 को गीतांगिनी नाम से एक संकलन का संपादन और प्रकाशन किया था। उस संकलन की भूमिका में उन्होंने पहली बार नवगीत शब्द का उल्लेख करते हुए उसकी प्रवृत्तियों और स्वरूप को स्पष्ट किया था। इसी कारण मुजफ्फरपुर को नवगीत आंदोलन की जन्मभूमि के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है।

राष्ट्रीय नवगीत उत्सव के दौरान देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले नवगीतकारों को हिंदी साहित्य की महान परंपरा से जुड़े विशिष्ट रचनाकारों के नाम पर सम्मानित किया जाएगा। आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री, कविवर राजेंद्र प्रसाद सिंह, पद्मश्री श्यामनंदन किशोर, गीतगंधर्व डॉ शिवदास पांडेय तथा डॉ शांति सुमन के नाम से नवगीत साधना सम्मान प्रदान कर रचनाकारों को अलंकृत किया जाएगा। यह सम्मान उन साहित्यकारों को समर्पित होगा जिन्होंने नवगीत की परंपरा को अपनी रचनात्मक साधना से समृद्ध किया है।

एल एन टी कॉलेज की प्राचार्या डॉ ममता रानी ने बताया कि यह आयोजन सुबह 9 बजे से आरंभ होकर रात 9 बजे तक चलेगा और पूरे दिन साहित्यिक गतिविधियों का सिलसिला चलता रहेगा। इसी अवसर पर नवगीत अर्धशतक भाग दो का लोकार्पण भी किया जाएगा, जिसका संपादन शिवानंद सिंह सहयोगी ने किया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नवगीत साहित्य के अध्ययन और उसकी परंपरा को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

डॉ ममता रानी ने कहा कि यह आयोजन हिंदी साहित्य के अध्येताओं, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। इससे नवगीत से अपरिचित पाठक, शोधार्थी और रचनाकार भी इस काव्यधारा की मूल संवेदना और उसकी सृजनात्मक परंपरा से परिचित हो सकेंगे। शोधार्थियों के लिए एक खुला सत्र भी आयोजित किया जाएगा जिसमें प्रश्नोत्तर के माध्यम से नवगीत के विभिन्न पहलुओं पर संवाद होगा।

प्रेसवार्ता में डॉ रंजीत पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार का व्यापक नवगीत उत्सव पहली बार आयोजित किया जा रहा है और इसका श्रेय मुजफ्फरपुर को मिलना इस शहर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि नवगीत शब्द के नामकरण का गौरव भी इसी शहर को प्राप्त है और यह आयोजन उस ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करेगा।

प्रेसवार्ता में कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ विजेंद्र झा, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ चितरंजन कुमार, डॉ अविनाश तिरंगा, प्रमोद आजाद तथा आयोजन समिति के अन्य सहयोगी उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने बताया कि इस साहित्यिक समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

नवगीत उत्सव केवल कॉलेज परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। नवगीतकारों के साथ 13 और 14 मार्च को वैशाली और सीतामढ़ी के लिए नवगीत उत्सव यात्रा भी आयोजित की जाएगी। इन दोनों स्थानों पर नवगीतकारों का सम्मान किया जाएगा और नवगीत की परंपरा तथा उसकी सृजनात्मक चेतना पर संवाद किया जाएगा। आयोजन समिति का मानना है कि इस यात्रा के माध्यम से नवगीत की धारा को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

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