July 17, 2026

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पंचायत वॉयस की मुहिम लाई रंग, ऐतिहासिक विरासत को संवारने की कवायद तेज

पंचायत वॉयस
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घोड़दौर पोखर पर प्रशासन सख्त, एसडीएम और सीओ ने मौके पर पहुंचकर विभागीय अधिकारियों को लगाई फटकार

BIHAR : पूर्वी चंपारण में जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का असर एक बार फिर देखने को मिला है। पताही स्थित ऐतिहासिक घोड़दौर पोखर के जीर्णोद्धार कार्य में बरती जा रही लापरवाही और सुस्ती को लेकर ‘पंचायत वॉयस’ द्वारा प्रकाशित विशेष रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। वर्षों पुरानी इस ऐतिहासिक धरोहर के कायाकल्प कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने की खबर सामने आने के बाद जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

‘पंचायत वॉयस’ ने अपनी रिपोर्ट में उजागर किया था कि परियोजना को 15 मई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित था, लेकिन समयसीमा बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। मानसून की दस्तक से पहले काम पूरा नहीं होने की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही थी। खबर प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया और निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कराई।

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जिलाधिकारी के निर्देश पर पकड़ीदयाल की अनुमंडल पदाधिकारी मंगला कुमारी तथा पताही की अंचलाधिकारी नाज़नी अकरम ने संयुक्त रूप से निर्माण स्थल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्यों की धीमी गति पर अधिकारियों ने गहरी नाराजगी जताई और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मियों को कड़ी फटकार लगाई। अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए।

निरीक्षण के दौरान विभागीय अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि मानसून के आगमन से पहले सभी शेष कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। इसके लिए 15 जून की नई समयसीमा निर्धारित की गई है। प्रशासन ने भी संकेत दिया है कि तय समय के भीतर काम पूरा नहीं होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

घोड़दौर पोखर केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण 15वीं शताब्दी में मिथिला के प्रतापी राजा शिव सिंह के शासनकाल में कराया गया था। लगभग 700 वर्षों से यह स्थल लोकआस्था, संस्कृति और क्षेत्रीय गौरव का केंद्र बना हुआ है।

राज्य सरकार ने इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और विकास के लिए 9.31 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना स्वीकृत की है। योजना के तहत भव्य घाटों का निर्माण, पेवर ब्लॉक ट्रैक, म्यूजिकल फाउंटेन, हाईमास्ट लाइट, सौंदर्यीकरण और औषधीय उद्यान विकसित किए जाने हैं। परियोजना का उद्देश्य घोड़दौर पोखर को पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है, जिससे क्षेत्र की पहचान को नई ऊंचाई मिल सके।

स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्धजनों का कहना है कि यदि योजना समय पर पूरी हो जाती है तो पताही को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। लोगों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक पोखर का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास का माध्यम बन सकती है।

ग्रामीणों की नाराजगी का एक बड़ा कारण यह भी था कि डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कार्य की प्रगति अपेक्षित स्तर पर नहीं दिख रही थी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया, जिससे परियोजना की स्थिति और खर्च से जुड़ी जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रही थी। पारदर्शिता की कमी को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे थे।

अब प्रशासनिक सक्रियता के बाद लोगों की उम्मीदें फिर से जागी हैं। क्षेत्रवासियों की निगाहें 15 जून की नई समयसीमा पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि इस बार प्रशासन की सख्ती का असर जमीन पर दिखाई देगा और सदियों पुरानी यह ऐतिहासिक धरोहर अपने नए और भव्य स्वरूप में सामने आएगी।

जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि घोड़दौर पोखर के जीर्णोद्धार कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि जनता की आस्था, ऐतिहासिक विरासत और सरकारी धन का सम्मान करते हुए सभी कार्य गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं। अब देखना यह है कि प्रशासन की सख्ती और विभागीय सक्रियता के बाद यह महत्वाकांक्षी परियोजना तय समय पर पूरी हो पाती है या नहीं।

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