July 1, 2026

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मोदी-ट्रंप के ताजा बयान से रिश्तों में आई नई गर्माहट

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  • नई दिल्ली/वॉशिंगटन : टैरिफ और तेल खरीद जैसे मुद्दों पर मतभेद कायम हैं, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की ताजा बयानबाजी से साफ है कि रिश्तों में अब धीरे-धीरे सहजता लौट रही है

Khabari Chiraiya Desk: भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर उपजा विवाद अब शांत होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दोस्ती को फिर से मजबूत शब्दों में दोहराया है। उन्होंने साफ कहा कि चाहे मतभेद क्यों न हों, वह हमेशा मोदी के दोस्त बने रहेंगे। ट्रंप ने यह भी भरोसा दिलाया कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते विशेष और गहरे हैं और कभी-कभी आने वाले कठिन पल इन पर असर नहीं डाल सकते।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्रंप के बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की भावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच दूरदर्शी, सकारात्मक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी कायम है। मोदी के अनुसार, दोनों देशों के संबंध भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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रूस से तेल खरीद पर ट्रंप की नाराज़गी

व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए ट्रंप ने भारत द्वारा रूस से अधिक तेल खरीदे जाने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि इस मसले पर उन्होंने भारत को अवगत भी कराया है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत का शुल्क लगाया हुआ है, जो अभी बरकरार है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी भारत-रूस की बढ़ती नज़दीकियों पर टिप्पणी की और प्रधानमंत्री मोदी की एक पुरानी तस्वीर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के नेता शी चिनफिंग के साथ साझा करते हुए लिखा कि लगता है भारत और रूस चीन के खेमे की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके और मोदी के बीच संबंध मजबूत हैं और मोदी एक शानदार प्रधानमंत्री हैं।

व्यापार वार्ता पर सकारात्मक रुख

भारत को लेकर नाराज़गी जताने के बावजूद ट्रंप ने यह स्वीकार किया कि भारत सहित कई देशों के साथ व्यापार वार्ताएं सकारात्मक दिशा में बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि अन्य देश भी अच्छा कर रहे हैं और अमेरिका भी उनके साथ बेहतर तालमेल बना रहा है। हालांकि यूरोपीय संघ को लेकर उन्होंने असंतोष जताया और कहा कि वहां अमेरिकी कंपनियों के साथ उचित व्यवहार नहीं हो रहा है।

रिश्तों में फिर आई सहजता

टैरिफ और तेल खरीद जैसे मुद्दों पर मतभेद कायम हैं, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की ताजा बयानबाजी से साफ है कि रिश्तों में अब धीरे-धीरे सहजता लौट रही है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत और अमेरिका की साझेदारी इतनी गहरी और बहुआयामी है कि अस्थायी विवाद उसे प्रभावित नहीं कर सकते।

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