दिल्ली में ढही चार मंज़िला इमारत, सरकार की नींद अब भी गहरी
- पंजाबी बस्ती में जर्जर इमारत का मलबा किस्मत से मौतगाह नहीं बना, लेकिन हादसा फिर भी भयावह था
Khabari Chiraiya Desk: दिल्ली के पंजाबी बस्ती इलाके, सब्ज़ी मंडी थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात चार मंज़िला इमारत धराशायी हो गई। इमारत खाली थी, इसलिए बड़ी जनहानि टल गई, लेकिन कई वाहन मलबे में दब गए। पास की इमारत में फंसे 14 लोगों को फायर सर्विस की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला, हालांकि कुछ लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव अभियान अब भी जारी है। यह हादसा बताता है कि जर्जर मकानों की समस्या केवल दीवारों तक सीमित नहीं है, यह सीधे लोगों की जिंदगी और सुरक्षा से जुड़ी है।
हकीकत यह है कि दिल्ली से लेकर मुंबई और लखनऊ तक, देश के लगभग हर शहर में ऐसे पुराने भवन खड़े हैं जो किसी भी वक्त मौत का कारण बन सकते हैं। हर हादसे के बाद सरकारें और स्थानीय निकाय जांच बैठाते हैं, प्रेस नोट जारी करते हैं और मुआवज़ा बांटते हैं, लेकिन वास्तविक समाधान कभी सामने नहीं आता। लोग मजबूरी में उन इमारतों में रह रहे हैं जिनकी नींव कब ढह जाएगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं।

जरूरी है कि ऐसे भवनों की पहचान समय पर की जाए। नियमित संरचनात्मक जांच हो, खतरनाक घोषित इमारतों को या तो तुरंत ढहाया जाए या मरम्मत कराई जाए। जिन परिवारों को हटाया जाता है, उनके लिए वैकल्पिक आवास और सहायता सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें सड़क पर न आना पड़े। पुनर्विकास योजनाओं को तेज़ और पारदर्शी बनाना होगा, ताकि लोग सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ सकें।
इससे भी आगे बढ़कर नागरिकों को भरोसा दिलाना जरूरी है। हर वार्ड में हेल्पलाइन सक्रिय हो, शिकायतों पर त्वरित निरीक्षण किया जाए और भवन सुरक्षा की जानकारी सार्वजनिक की जाए। यह पारदर्शिता ही जवाबदेही को जन्म देगी और लोगों की जान बचा सकेगी।
शहर केवल ऊंची इमारतों और चौड़ी सड़कों से नहीं, बल्कि सुरक्षित आवासों और जिम्मेदार प्रशासन से बनते हैं। अगर हम चेतावनी के इन संकेतों को अब भी अनसुना करेंगे तो अगली बार मलबे से सिर्फ गाड़ियां नहीं बल्कि दर्जनों लाशें निकलेंगी। समय है कि सरकार भाग्य पर नहीं, नीयत और नीति पर भरोसा करके ठोस कदम उठाए।
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