आज तय होगा कौन बनेगा देश का नया उपराष्ट्रपति
- राधाकृष्णन बनाम सुदर्शन रेड्डी रोमांचक मुकाबला। राजग के पास 425 सांसद, विपक्ष की ओर से 324 का दावा
Khabari Chiraiya Desk: संसद भवन का कमरा एफ-101 आज पूरे देश की निगाहों का केंद्र बना हुआ है। आज यहां उपराष्ट्रपति चुनाव है। सुबह 10 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक सांसद मतदान करेंगे और छह बजे के बाद वोटों की गिनती शुरू होगी। उम्मीद है कि देर रात तक देश को नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा। खास बात यह है कि इस चुनाव में पार्टी व्हिप लागू नहीं होता, यानी सांसद अपनी व्यक्तिगत समझ और विवेक से वोट देंगे।
मुकाबले में कौन-कौन?

राजग की ओर से महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु के वरिष्ठ भाजपा नेता सी.पी. राधाकृष्णन मैदान में हैं। आरएसएस से लंबे समय से जुड़े राधाकृष्णन तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए जाने जाते हैं और उनकी छवि मृदुभाषी तथा गैर-विवादास्पद नेता की रही है।
वहीं विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उतारा है। 2011 में सेवानिवृत्त हुए रेड्डी का नाम कई ऐतिहासिक फैसलों से जुड़ा है-चाहे वह सलवा जुडूम को असंवैधानिक ठहराने का निर्णय हो या काले धन पर केंद्र सरकार की ढिलाई की आलोचना। विपक्ष उन्हें संविधान मूल्यों के रक्षक के तौर पर प्रस्तुत कर रहा है।
नंबर गेम और समीकरण
निर्वाचक मंडल में कुल 788 सदस्य होने चाहिए थे, लेकिन सात सीटें रिक्त होने से आज 781 सांसद वोट देंगे। जीत के लिए 391 वोटों की आवश्यकता है। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि भाजपा नेतृत्व वाले राजग को बढ़त है। राजग के पास 425 सांसद हैं जबकि विपक्ष के खाते में 324। इसके अलावा वाईएसआरसीपी के 11 सांसदों ने भी एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने का एलान कर रखा है। वहीं बीजद और बीआरएस ने मतदान से दूरी बनाई है।
राधाकृष्णन की छवि बनी ताकत
तमिलनाडु के कोयंबटूर से दो बार सांसद रह चुके राधाकृष्णन फिलहाल महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। ओबीसी समुदाय से आने वाले इस नेता की सादगी और साफ छवि राजग के लिए बोनस साबित हो रही है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने विभिन्न राज्यों के सांसदों से व्यक्तिगत मुलाकात कर समर्थन जुटाया था।
सुदर्शन रेड्डी का न्यायिक सफर
79 वर्षीय रेड्डी का करियर न्यायपालिका में उल्लेखनीय रहा है। वे आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के जज, गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अंततः सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रहे। तेलंगाना में जातिगत सर्वेक्षण से जुड़ी कमेटी का नेतृत्व भी उन्होंने किया। विपक्ष उन्हें एक ऐसे उम्मीदवार के रूप में पेश कर रहा है जो सत्ता की राजनीति से परे खड़े होकर संविधान के मूल्यों की रक्षा कर सकते हैं।
मतदान प्रणाली क्यों अलग
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव सामान्य चुनावों की तरह ईवीएम से नहीं होता। इसमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली अपनाई जाती है। सांसदों को मतपत्र पर उम्मीदवारों के सामने वरीयता क्रम में अंक देना होता है। यही कारण है कि आज का मतदान पूरी तरह कागज पर हो रहा है।
नतीजों का इंतजार
जैसे-जैसे दिन ढलता जाएगा, दिल्ली की सियासी गलियों में उत्सुकता बढ़ती जाएगी। सांसद अपनी प्राथमिकता दर्ज कर चुके होंगे और मतगणना की घड़ी करीब आते ही रोमांच चरम पर होगा। देर रात तक देश को यह पता चल जाएगा कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा-राजग के मृदुभाषी संगठनकर्ता सी.पी. राधाकृष्णन या विपक्ष के न्यायप्रिय जज बी. सुदर्शन रेड्डी।
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