बिहार : मुख्यमंत्री फैलोशिप योजना को मिली हरी झंडी, आईआईएम बोधगया में होगी ट्रेनिंग
- चयनित प्रतिभागियों को मिलेगा आकर्षक मानदेय, नीतीश कैबिनेट का बड़ा फैसला
Khabari Chiraiya Desk : बिहार सरकार ने राज्य की प्रशासनिक गुणवत्ता को और ऊंचाई देने के लिए एक नई पहल की है। मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री फैलोशिप योजना को मंजूरी दे दी गई। इस योजना का मकसद लोक नीति निर्माण और क्रियान्वयन में पेशेवर और उच्चस्तरीय योगदान सुनिश्चित करना है।
इस योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न सरकारी कार्यालयों से चुने गए 121 कर्मियों को आईआईएम बोधगया में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह फैलोशिप दो साल की होगी और पूरा होने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा।

मानदेय को लेकर योजना को और भी आकर्षक बनाया गया है। चयनित प्रतिभागियों को उनकी भूमिका और स्तर के अनुसार 80 हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक प्रति माह मानदेय मिलेगा। इस तरह सरकार चाहती है कि श्रेष्ठ प्रतिभाएं नीति निर्माण से लेकर उसके धरातल पर लागू होने तक की प्रक्रिया में अपना योगदान दें।
फैलोशिप की जिम्मेदारियां मुख्यमंत्री कार्यालय, उपमुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय, विकास आयुक्त कार्यालय, विभागीय सचिवालय, प्रमंडलीय आयुक्त और नगर आयुक्त के कार्यालयों तक फैली होंगी। यानी, योजना न सिर्फ प्रशिक्षण तक सीमित होगी बल्कि विभिन्न प्रशासनिक ढांचों में सीधे जुड़ाव का अवसर भी देगी।
नीतीश सरकार का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करेगा और शासन व्यवस्था को आधुनिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाएगा। इससे नीतियों के क्रियान्वयन में न केवल तेजी आएगी बल्कि उनकी गुणवत्ता और असर भी बढ़ेगा।
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