June 30, 2026

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दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न देने की सख्त सलाह

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  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बच्चों की मौत से जुड़े मामले में जांच रिपोर्ट नेजहरीले तत्वों की आशंका को खारिज किया है, लेकिन माता-पिता को घरेलू उपचार और डॉक्टर की राय को ही प्राथमिकता देने पर जोर दिया है

Khabari Chiraiya Desk : मध्य प्रदेश और राजस्थान में मासूमों की मौत से जुड़ा कफ सिरप विवाद अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को साफ किया कि छिंदवाड़ा और राजस्थान से लिए गए सिरप के नमूनों में किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले जहरीले रसायन डायएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल नहीं पाए गए। इन नमूनों की जांच नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन जैसी शीर्ष एजेंसियों ने की।

हालांकि रिपोर्ट में इन जहरीले तत्वों की अनुपस्थिति बताई गई है, लेकिन सरकार ने बच्चों में कफ सिरप के उपयोग को लेकर बेहद सख्त सलाह जारी की है। स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी हालत में खांसी-जुकाम की दवाएं न दी जाएं। वहीं पांच साल से कम उम्र के बच्चों के मामले में भी सामान्य तौर पर ऐसी दवाएं न दी जाएं क्योंकि ज्यादातर मामलों में खांसी-जुकाम अपने आप ही ठीक हो जाता है।

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सरकार का कहना है कि माता-पिता को दवा की जगह घरेलू उपचार को प्राथमिकता देनी चाहिए। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ दें, उन्हें आराम कराएं और जरूरत पड़ने पर भाप दिलवाएं। डॉक्टरों से परामर्श के बाद ही दवा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। साथ ही दवा कंपनियों को सख्ती से गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस का पालन करने और कई दवाओं के मिश्रण से बचने की हिदायत दी गई है।

छिंदवाड़ा में पिछले पंद्रह दिनों के भीतर नौ बच्चों की मौत ने पूरे प्रशासन को हिला कर रख दिया। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई थी कि बच्चों को दिए गए कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप में जहरीले रसायन मौजूद थे। किडनी बायोप्सी में भी डायएथिलीन ग्लाइकॉल जैसे तत्व पाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने जिले में इन दोनों सिरप की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी और दुकानदारों से लेकर डॉक्टरों तक को सख्त चेतावनी जारी की।

राजस्थान में भी तीन बच्चों की मौत कफ सिरप से जुड़ी बताई गई है। यहां सरकार ने मुफ्त में वितरित किए जाने वाले जेनेरिक सिरप की आपूर्ति करने वाली कंपनी केसन फार्मा के सभी उत्पादों की जांच के आदेश दिए हैं। सिरप बनाने वाली कंपनी पर भी जांच एजेंसियों की नजर है और सैंपल की बारीकी से जांच की जा रही है।

इन घटनाओं ने एक बार फिर बच्चों की दवाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की एडवायजरी अब इस बात को लेकर है कि बच्चों के इलाज में जल्दबाज़ी और लापरवाही घातक साबित हो सकती है। इसलिए इलाज की पहली सीढ़ी घरेलू देखभाल और डॉक्टर की राय ही होनी चाहिए, दवा आखिरी विकल्प बने।

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