बिहार में पारदर्शी चुनाव की तैयारी पूरी 8.5 लाख अधिकारी और कर्मी तैनात
- पहली बार राज्य के सभी 243 निर्वाचन क्षेत्रों में एक-एक सामान्य पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं
Khabari Chiraiya Desk: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर निर्वाचन आयोग ने व्यापक और सटीक तैयारी पूरी कर ली है। आयोग ने चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए राज्यभर में करीब 8.5 लाख अधिकारियों और कर्मियों की तैनाती की है। यह अब तक का सबसे बड़ा चुनावी प्रबंधन अभियान माना जा रहा है, जिसमें न केवल मतदान बल्कि सुरक्षा, पर्यवेक्षण और मतगणना तक की हर प्रक्रिया पर पैनी नजर रखी जाएगी।
निर्वाचन आयोग ने बताया कि तैनात किए गए कार्मिकों में लगभग 4.53 लाख मतदान कर्मी, 2.5 लाख पुलिस अधिकारी, 28,370 मतगणना कर्मी, 17,875 माइक्रो ऑब्जर्वर, 9,625 सेक्टर अधिकारी और 4,840 मतगणना पर्यवेक्षक शामिल हैं। इसके अलावा 90,712 आंगनवाड़ी सेविकाओं को भी इस चुनावी व्यवस्था में जोड़ा गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों तक मतदान प्रक्रिया की सटीकता और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।

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जनसंपर्क और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने इस बार कई नई पहलें भी शुरू की हैं। राज्यभर में 90,712 बीएलओ (बूथ स्तर अधिकारी) और 243 ईआरओ (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) को सीधे जनता से जोड़ा गया है। अब मतदाता ‘बुक-अ-कॉल टू बीएलओ’ सुविधा के माध्यम से ईसीआईनेट ऐप या फोन कॉल पर अपने मतदान संबंधी प्रश्नों और शिकायतों का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए सभी जिलों में +91 (एसटीडी कोड) 1950 पर कॉल सेंटर सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 28ए के तहत सभी तैनात अधिकारी और कर्मचारी निर्वाचन आयोग की प्रतिनियुक्ति पर माने जाएंगे, जिससे किसी भी स्तर पर हस्तक्षेप की संभावना समाप्त हो जाती है।
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इस बार बिहार के 243 विधानसभा क्षेत्रों में से प्रत्येक में एक सामान्य पर्यवेक्षक की नियुक्ति की गई है जो आयोग की “आँख और कान” के रूप में कार्य करेंगे। इसके साथ ही 38 पुलिस पर्यवेक्षक और 67 व्यय पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं जो मतदान प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी खर्च की निगरानी करेंगे। ये सभी अधिकारी सीधे निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट करेंगे और राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों से नियमित संवाद बनाए रखेंगे।
आयोग का कहना है कि बिहार में इस बार का चुनाव न केवल पैमाने के लिहाज से सबसे बड़ा है, बल्कि पारदर्शिता और जनता की भागीदारी के दृष्टिकोण से भी ऐतिहासिक रहेगा। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि हर मतदाता की सुविधा, सुरक्षा और विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी ताकि लोकतंत्र का यह पर्व पूरी निष्ठा और निष्पक्षता के साथ संपन्न हो सके।
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