June 23, 2026

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राफेल पर राष्ट्रपति की उड़ान ने बढ़ाया भारत का गौरव

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  • सशस्त्र बलों की सुप्रीम कमांडर ने अनुभव किया देश की हाई-टेक सैन्य ताकत, अंबाला से पंद्रह हजार फीट की ऊंचाई पर तेज रफ्तार में उड़ान

Khabari Chiraiya, अंबाला (हरियाणा) : देश की सर्वोच्च कमांडर ने जब अत्याधुनिक राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरी तो न सिर्फ आसमान गूंज उठा बल्कि भारतीय रक्षा सामर्थ्य पर पूरे देश का गर्व भी नई ऊंचाइयों पर पहुँच गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को अंबाला वायुसेना स्टेशन से राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। वे भारतीय वायुसेना के दो सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान सुखोई और राफेल में उड़ान भरने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं।

अंबाला वायुसेना स्टेशन वह अहम ठिकाना है जहां फ्रांस के दसॉल्ट एविएशन से आए राफेल विमानों की पहली तैनाती हुई थी। राष्ट्रपति ने लगभग तीस मिनट तक हवा में डटे रहते हुए करीब दो सौ किलोमीटर की दूरी तय की। यह उड़ान समुद्र तल से पंद्रह हजार फीट की ऊंचाई पर और लगभग सात सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूरी की गई। इस उड़ान को भारतीय वायुसेना की 17 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी ने संचालित किया।

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राष्ट्रपति मुर्मू वायुसेना स्टेशन लौटने के बाद अपनी अनुभूति को शब्दों में समेट नहीं पाईं। आगंतुक पुस्तिका में उन्होंने लिखा कि राफेल पर यह पहली उड़ान उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है और इससे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं के प्रति उनके मन में गर्व की नई भावना जागी है। उन्होंने इस उत्कृष्ट संचालन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भारतीय वायुसेना की पूरी टीम को बधाई दी।

भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर होने के नाते राष्ट्रपति के इस कदम का महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि यह न सिर्फ आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है बल्कि यह संदेश भी देता है कि भारत की नई सुरक्षा शक्ति सिर्फ कागज़ों में नहीं, बल्कि आकाश में दहाड़ते तेजस्वी इंजनों में भी दर्ज है। इस दौरान उन्हें राफेल की परिचालन विशेषताओं और भारतीय वायुसेना की सामरिक क्षमता के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी गई। राष्ट्रपति की इस यादगार उड़ान ने अंबाला को एक बार फिर राष्ट्रीय गौरव का केंद्र बना दिया। यह पल भारतीय आसमान में शक्ति, साहस और आधुनिक सैन्य क्षमता का प्रतीक बनकर दर्ज हो गया है।

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