June 30, 2026

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मोतिहारी में स्थापित होगा तीन करोड़ में बना 33 फीट का विशाल शिवलिंग

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  • तमिलनाडु की धरती पर दस वर्ष की मेहनत ने इसे दिव्यता का रूप दिया है, 96 चक्का ट्रक पर चल रही यह यात्रा हर राज्य में श्रद्धा की लहर जगाएगी

नीरज कुमार, पूर्वी चंपारण

पूर्वी चंपारण के चकिया स्थित जानकीनगर में बन रहे विराट रामायण मंदिर के लिए एक पावन और ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तप, साधना और शिल्प की दस वर्ष की लंबी साधना के बाद भगवान भोलेनाथ का 33 फीट ऊंचा और 210 मीट्रिक टन वजनी अद्वितीय शिवलिंग अब मोतिहारी की ओर प्रस्थान कर चुका है। विशाल ग्रेनाइट शिला से निर्मित यह दिव्य प्रतिमूर्ति आने वाले वर्षों में बिहार की आध्यात्मिक पहचान का केंद्र बनेगी।

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शिव भक्ति का दशक भर का श्रम

पट्टीकाडु गांव में शिल्पकार लोकनाथ की टीम ने दस वर्षों तक अथक परिश्रम कर इस पुण्य प्रतिमा को आकार दिया। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह शिवलिंग अपनी भव्यता और दिव्यता दोनों के लिए अद्वितीय माना जा रहा है। शिवलिंग निर्माण करने वाली कंपनी के संस्थापक विनायक वेंकटरमण ने बताया कि 21 नवंबर को विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना के बाद 96 चक्का वाले विशेष ट्रक पर प्रतिष्ठित शिवलिंग की प्रस्थान यात्रा आरंभ हुई।

आशीर्वाद की 25 दिन की पवित्र यात्रा

महाबलीपुरम से चकिया तक यह दिव्य यात्रा लगभग 20 से 25 दिनों का समय लेगी। मार्ग में होसुर, हैदराबाद, नागपुर, जबलपुर, रीवा, मिर्जापुर और आरा जैसे प्रमुख शहरों में भक्तगण शिवलिंग का भव्य स्वागत करेंगे। मंदिर प्रशासन का अनुमान है कि जनवरी–फरवरी 2026 के मध्य तक शिवलिंग को गर्भगृह में स्थापित कर दिया जाएगा। यह स्थापना पूर्वी चंपारण में शिव-कृपा और आस्था का अद्वितीय संगम रचेगी।

विश्व मंच पर बिहार की नई आध्यात्मिक पहचान

महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा आचार्य किशोर कुणाल के दिव्य स्वप्न के रूप में बन रहा विराट रामायण मंदिर न केवल भारत बल्कि विश्व स्तर पर धार्मिक आस्था का अद्भुत प्रतीक बनने जा रहा है। मंदिर का आकार 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इसमें 18 शिखर, 22 उप-मंदिर और 270 फीट ऊंचा मुख्य शिखर होगा, जो इसकी अलौकिक भव्यता को दर्शाएगा। 20 जून 2023 को हुए शिलान्यास के बाद से निर्माण कार्य निरंतर गति पकड़ रहा है। न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि निर्धारित समय पर निर्माण पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि बिहार दुनिया के आध्यात्मिक मानचित्र पर और अधिक ऊंचाई प्राप्त कर सके।

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