June 15, 2026

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शिक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, निरीक्षण के दौरान देवरिया में खुली बेसिक शिक्षा विभाग के सिस्टम की पोल

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डीएम ने कहा- शिक्षा प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसमें किसी भी तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं है

  • विद्यालय के अटेंडेंस रजिस्टर में 28 अप्रैल के बाद की नहीं दर्ज थी उपस्थिति, मिड-डे-मील में दूध का वितरण भी नहीं हुआ
  • 8 सितंबर 2021 को खंड शिक्षा अधिकारी ने किया था इस विद्यालय का निरीक्षण, इसके बाद कभी गए ही नहीं

प्राथमिक विद्यालय के निरीक्षण में बेसिक शिक्षा विभाग के सिस्टम की पोल खुली गई। अनियमितताओं की जमीनी सच्चाई से और कोई नहीं खुद डीएम रूबरू हुए। खबर यूपी के जनपद देवरिया से है। इन सब के लिए जिम्मेदार बीएसए से डीएम ने तत्काल जवाब तलब किया है। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। इन जिम्मेदारों से डीएम ने कहा कि शिक्षा प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं है।

हुआ यूं कि बुधवार को दिन के 12 बजकर 35 मिनट पर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह जनपद मुख्यालय से कुछ दूर स्थित सदर ब्लॉक के अंनर्गत के आने वाले प्राथमिक विद्यालय कतरारी नंबर-1 पहुंच गए। वहां उन्होंने सबसे पहले विद्यार्थियों की उपस्थिति पंजिका को देखा, जिसमें 28 अप्रैल के बाद से उपस्थिति ही दर्ज नहीं थी। प्रधानाध्यापिका ने डीएम को बताया कि विद्यालय में कुल 108 विद्यार्थियों का नामांकन है, जिसमें से 55 की उपस्थित हैं।

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विद्यालय में तैनात तीन शिक्षकों में से 2 उपस्थित मिले। शिक्षा मित्र किरण पासवान बिना किसी अवकाश स्वीकृति के अनुपस्थित मिलीं। प्रधानाध्यापिका रीमा सिंह ने खुद के लेट आने की बात स्वीकार कीं। फिर डीएम ने रसोइये से मिड-डे-मील के हालात की जानकारी ली, तो रसोइये ने बताया कि शेड्यूल के अनुसार 55 विद्यार्थियों के लिए तहरी बनाई गई है। प्रधानाध्यापिका के विलंब से आने की वजह से दूध का वितरण नहीं हो सका। इस पर डीएम ने नाराज़गी व्यक्त की।

विद्यालय परिसर में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बने शौचालय में ताला बंद था और पोषण वाटिका की दशा अत्यंत ही खराब मिली। यहां डीएम ने विद्यालय परिसर को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने की नसीहत दी। निरीक्षण पंजिका में टिप्पणी लिखने के दौरान डीएम ने पाया कि विद्यालय का अंतिम बार निरीक्षण 8 सितंबर 2021 को खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा किया गया था। उसके बाद शिक्षा विभाग के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने विद्यालय का निरीक्षण नहीं किया था। इस प्वाइंट पर भी डीएम ने जिम्मेदारों को कटघरे में खड़ा किया।

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