June 13, 2026

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महाकुंभ में भगदड़ : 17 श्रद्धालुओं की मौत, 50 से अधिक घायल

महाकुंभ

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मौनी अमावस्या स्नान के दौरान बड़ा हादसा, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, अफवाहों से बचने की अपील

Khabari Chiraiya Desk : प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के अवसर पर बुधवार तड़के भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई, जिसमें 17 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 50 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसा पोल नंबर 90 से 118 के बीच हुआ, जहां श्रद्धालुओं के दबाव से बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से घटना की जानकारी ली और तत्काल राहत कार्य तेज करने और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा देने के निर्देश दिए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशासन सभी की सेवा के लिए तत्परता से कार्य कर रहा है। श्रद्धालुओं से अपील की है कि अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन का सहयोग करें।

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कैसे हुई घटना?

बुधवार तड़के 2 बजे, जब लाखों श्रद्धालु संगम स्नान के लिए घाटों की ओर बढ़ रहे थे, तभी अत्यधिक भीड़ के दबाव में बैरिकेडिंग टूट गई और भगदड़ मच गई। इस दौरान कई लोग दब गए और घायल हो गए। रेस्क्यू टीम और एंबुलेंस पांच मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गईं, लेकिन भगदड़ के कारण कई श्रद्धालुओं की हालत गंभीर हो गई।

अमृत स्नान में हुआ बदलाव

भगदड़ के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अमृत स्नान को रद्द करने की घोषणा की थी। परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने कहा, “हमारे संन्यासी तैयार थे, लेकिन जो हुआ, उसे देखते हुए हमने अमृत स्नान स्थगित करने का फैसला लिया।” बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न अखाड़ों के संतों से चर्चा की, जिसके बाद निर्णय लिया गया कि अमृत स्नान 11 बजे के बाद चरणबद्ध तरीके से होगा, लेकिन इस बार पारंपरिक शोभायात्रा नहीं निकलेगी। संत सीधे स्नान के लिए जाएंगे और कोई भव्य जुलूस नहीं निकाला जाएगा।

प्रत्यक्षदर्शियों का बयान

घटना में बची सरोजिनी (कर्नाटक निवासी) ने कहा, “अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई। चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। हम भाग नहीं सके, हर तरफ से लोग धक्का दे रहे थे।” सरोजिनी अपने 60 लोगों के समूह के साथ आई थीं, जिनमें से 9 लोग इस भगदड़ में घायल हो गए।

घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया

घायलों को महाकुंभ के केंद्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं को बेली अस्पताल और स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। अस्पतालों में घायलों के परिजनों की भीड़ उमड़ पड़ी, जहां लोग अपने परिजनों की सलामती की दुआ मांग रहे थे।

प्रशासन ने पहले ही जारी की थी एडवाइजरी

महाकुंभ मेले में भीड़ नियंत्रण को लेकर प्रशासन पहले ही सतर्क था और मंगलवार को एक एडवाइजरी जारी की गई थी। श्रद्धालुओं से कहा गया था कि वे संगम तक पहुंचने के लिए निर्धारित लेनों का उपयोग करें, अपनी लेन में बने रहें और स्नान के तुरंत बाद घाटों को खाली करें।प्रशासन ने यह भी कहा था कि संगम के सभी घाट समान रूप से पवित्र हैं, इसलिए श्रद्धालुओं को पहले जिस घाट पर जगह मिले, वहीं स्नान कर लेना चाहिए ताकि किसी एक जगह पर अत्यधिक भीड़ न हो।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस घटना के बाद महाकुंभ के भीड़ प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने पहले से एडवाइजरी जारी करने के बावजूद इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करने में कठिनाई झेली। विशेषज्ञों का मानना है कि महाकुंभ जैसे आयोजनों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, इसलिए भीड़ नियंत्रण के लिए और प्रभावी उपायों की जरूरत है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को अधिक मजबूत योजना बनानी होगी।

श्रद्धालुओं के लिए नई अपील

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। भीड़भाड़ से बचने के लिए प्रशासन की सलाह पर अमल करें और धैर्य बनाए रखें।

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